Delhi News : Women Power Took Command Of Voting – Mcd Elections : पिंक बूथ, रेड कार्पेट और रंग-बिरंगी सियासी टोपियों के बीच नारी शक्ति ने संभाली मतदान की कमान

एक पिंक बूथ...

एक पिंक बूथ…
– फोटो : अमर उजाला

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इस बार नारी शक्ति ने अपने दम पर 68 पिंक बूथों पर मतदान संपन्न करवाया। मतदाताओं के लिए रेड कार्पेट बिछाए और मतदान केंद्र के द्वार को फूलों से सजाकर स्वागत किया। बुजुर्ग मतदाताओं के साथ बीएलओ ने सेल्फी खींची और पहली बार वोट करने आए मतदाताओं से हाथ मिलाया। सुरक्षा की जिम्मेदारी भी महिला पुलिसकर्मियों ने संभाली और सभी बूथों पर शांतिपूर्वक मतदान को पूरा कराया।

पूर्वी दिल्ली में समसपुर गांव के अंदर स्कूल में पिंक बूथ बनाया गया था। यहां सेक्टर अधिकारी संघप्रिया के नेतृत्व में मतदान संपन्न हुआ। दो बीएलओ पूनम पाठक और अर्चना गोला ने अपनी जिम्मेदारियों का कुशलता से निर्वहन किया। सब इंस्पेक्टर सोनम, हेड कांस्टेबल शीतल, माया, आशा, मनीषा और गुड्डी ने सुरक्षा की जिम्मेदारी संभाली। संघप्रिया ने बताया कि यहां दो पोलिंग बूथ थे। इनमें से एक सामान्य था। लेकिन दोनों को पिंक की तरह से विकसित किया गया। यहां पर छह महिला सुरक्षाकर्मियों, दो बीएलओ, पोलिंग टीम की चार अन्य महिला सदस्यों ने पूरी मतदान प्रक्रिया को संभाला।

मतदान केंद्र को पिंक थीम पर सजाया गया। द्वार से ईवीएम तक रेड कार्पेट बिछाई गई थी। हेल्प डेस्क, जरूरतमंद लोगों को मतदान केंद्र लाने ले जाने के लिए ई-रिक्शे और फर्स्ट एड का भी इंतजाम किया गया था। मतदान केंद्र पर व्लील चेयर की व्यवस्था थी। इस बूथ पर कुल मतदाताओं के लिहाज से मतदान का प्रतिशत दोपहर 2.20 बजे तक कम था। केवल 21 फीसदी मतदान हुआ था। संघप्रिया ने बताया कि मतदान के दो दिन पूर्व घर घर जाकर जागरूकता अभियान चलाया गया था और चौपाल भी लगाई गई थी। लेकिन वोट देने में कम लोगों ने दिलचस्पी दिखाई।

रंग-बिरंगी सियासी टोपियों ने उड़ाया आचार संहिता का मजाक
मतदान के दौरान रंग-बिरंगी सियासी टोपियों ने चुनाव आचार संहिता का जमकर मजाक उड़ाया। लगभग सभी कार्यकर्ताओं ने अपनी पार्टी के झंडे के रंग की टोपियां पहनी हुईं थीं। सभी पोलिंग बूथ के आसपास मंडराकर मतदाताओं को रिझाने का प्रयास कर रहे थे। कुछ जगहों पर पुलिसकर्मियों ने उन्हें टोक कर टोपियां उतरवा दीं, लेकिन ज्यादातर जगह लोग टोपी का किसी पार्टी से संबंध न होने की बात कर बच रहे थे। कुछ लोगों ने तो पार्टी के झंडे के रंग के कपड़े तक पहने हुए थे। वहीं, महिलाएं भी इस मामले में पीछे नहीं दिखीं। उन्होंने भी झंडे के रंग की चुन्नियां पहनी हुई थीं।

ओखला विधानसभा के कई मतदान केंद्रों के आसपास कुछ ऐसा ही नजारा था। किसी ने केसरिया तो किसी ने हरे, लाल व नीले रंग की टोपियां पहनी हुईं थीं। एक पार्टी से जुड़े कार्यकर्ता ने बताया कि अपने कार्यकर्ताओं की पहचान करने के लिए चुनाव प्रचार समाप्त होने के बाद इस तरह की टोपियां बनाकर बांट दी जाती हैं। मतदान वाले दिन इनका खूब इस्तेमाल होता है। वोटरों को घर से निकालकर केंद्रों तक पहुंचाने और अपने लिए वोट मांगने में इनका इस्तेमाल होता है, चूंकि टोपियों पर किसी भी पार्टी का चुनाव चिह्न नहीं होता। ऐसे में कोई चाहकर भी कुछ नहीं कर पाता। हालांकि, जामिया नगर के अबुल फजल एंक्लेव इलाके में पुलिस ने जबरन ऐसे कार्यकर्ताओं की टोपियां उतरवा दीं, लेकिन महिला कार्यकर्ताओं से कुछ न कह सके।

पैसे बांटने की झूठी सूचना से हड़कंप
दक्षिण जिले की आंबेडकर नगर थाना पुलिस को रविवार दोपहर भाजपा कार्यकर्ताओं की ओर से पैसे बांटकर मतदाताओं को प्रभावित करने की सूचना मिली। सूचना वार्ड नंबर-166, पुष्प विहार के आम आदमी पार्टी के प्रत्याशी अरुण नवारिया ने दी थी। मौके पर पहुंची पुलिस ने कई घंटे की जांच के बाद सूचना को झूठा करार दे दिया।

डीसीपी चंदन चौधरी ने बताया कि अरुण नवारिया ने दोपहर 1:21 बजे सूचना दी थी कि बुद्धा पार्क मदनगीर में भाजपा के कार्यकर्ता मतदाताओं को पैसे बांट रहे हैं। थानाध्यक्ष व एटीओ इंस्पेक्टर बीडी मीणा को मौके पर भेजा गया तो एक भी भाजपा कार्यकर्ता नहीं मिला। पुलिस को मदनगीर निवासी प्रदीप (25) मिला, लेकिन उसका किसी भी पार्टी से संबंध नहीं था। प्रदीप ने बताया कि वह गुरुग्राम में एक फर्नीचर वर्कशॉप में काम करता है। डीसीपी ने बताया कि दक्षिण जिले में कहीं भी पैसे नहीं बांटे गए और मतदान सभी जगहों पर शांतिपूर्ण रहा।

आयोग ने पल्ला झाड़ा
एमसीडी चुनाव के दौरान रविवार को प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष चौ. अनिल कुमार समेत बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में नहीं मिलने के मामले में दिल्ली राज्य चुनाव आयोग ने पल्ला झाड़ लिया है। आयोग का कहना है कि वह न मतदाता सूची में नाम जोड़ता है और न ही हटाता है। इसके अलावा मतदाता सूची को भी अंतिम रूप भी नहीं देता है। वह एमसीडी चुनाव के दौरान भारत के निर्वाचन आयोग के अधीन दिल्ली के मुख्य चुनाव कार्यालय की ओर से उपलब्ध कराई जाने वाली मतदाता का उपयोग करता है। मतदाता सूची में नाम जोड़ने व हटाने का कार्य केवल दिल्ली के मुख्य चुनाव कार्यालय करता है। 

सुबह डाले वोट, शाम को मस्ती
राजधानी में रविवार को मतदान करने के बाद लोगों ने शाम को परिवार के साथ मौज मस्ती की। दिल्ली के विभिन्न पर्यटन स्थलों पर लोगों का हुजूम देखने को मिला। इंडिया गेट, लाल किला, जामा मस्जिद, पुराना किला व चिडिय़ाघर में शाम तक लोगों की काफी भीड़ दिखी।

मताधिकार का प्रयोग करने के बाद शहरवासी मस्ती के मूड में दिखे। सबसे अधिक भीड़ लाल किला और चिडिय़ाघर में देखी गई। परिवार के साथ चिडिय़ाघर पहुंचे रमेश आहूजा ने कहा कि उन्होंने एक दिन पहले ही घूमने की योजना बना ली थी। इस वजह से सुबह जल्दी ही परिवार के साथ मतदान किया। इसके बाद घूमने निकल गए। वहीं, तिलक नगर से पहुंची शांति गुप्ता ने कहा कि छुट्टी का दिन होने की वजह से उन्होंने बच्चों को चिडिय़ाघर दिखाने की योजना बनाई थी। इसलिए मतदान के बाद सीधे चिडिय़ाघर का रुख किया। लाल किला देखने के लिए पटेल नगर से पहुंचे आशुतोष यादव ने कहा कि मतदान करने के बाद घर में रहने से बेहतर है कि परिवार के साथ किसी पर्यटन स्थल पर समय बिताया जाए।

न उम्र की सीमा थी, न तबके का था बंधन
मताधिकार का इस्तेमाल करने में बुजर्गों का जोश युवाओं से कम नहीं रहा। चलने फिरने में दिक्कत होने के बावजूद वह लाठी या फिर अपने बच्चों का सहारा लेकर मतदान केंद्रों पर पहुंचे। बुजुर्गों का कहना था कि वे इलाके की साफ सफाई और निगम से संबंधित मुद्दे को ध्यान में रखकर मतदान करने आए हैं। वे युवाओं को बताना चाहते हैं कि मत का इस्तेमाल कर ही वह निगम में साफ सुथरे छवि वाले लोगों को भेज सकते हैं। तमाम दिक्कतों और मुश्किल के बाद भी बाड़ा हिंदूराव के डिप्टीगंज निवासी 106 साल की शांति वाला वैध रविवार सुबह कन्या विद्यालय स्थित पोलिंग बूथ पर मत देने पहुंचीं। दिल्ली के अलग-अलग इलाकों से सैकड़ों की संख्या में बुजुर्ग मतदान केंद्र पर पहुंचे। इनमें ज्यादातर व्हील चेयर पर थे। इनका पुलिसकर्मियों ने खास ध्यान रखा और सहायता कर मतदान केंद्र पर पहुंचाया। ख्याला की 85 साल की सुरिंदर कौर लाठी का सहारा लेकर पहुंचीं। ऐसा ही कुछ दिल्ली के तुर्कमान गेट पर देखने को मिला, जहां एक बेटा अपने बुजुर्ग पिता को बाइक से लेकर आया था। दिल्ली में ऐसे सैकड़ों बुजुर्गों ने अपने जोश दिखाकर इस महापर्व में हिस्सा लिया और भविष्य की नींव रखी।

किराड़ी : दुल्हन वोट डालने पहुंची
हंसराज पब्लिक स्कूल के मतदान केंद्र पर एक दुल्हन वोट डालने पहुंची। सजी-धजी पहली बार वोट डालने पहुंची युवती ने कहा कि सफाई, कूड़े, सीवरेज सिस्टम जैसे मुद्दों को ध्यान में रखकर वोट दिया है। शाम को युवती के फेरे होने थे, उससे पहले मतदान केंद्र पर एक मिसाल कायम करते हुए उसने दूसरे लोगों से भी वोट देने की अपील की। 

पांच दोस्तों ने एक साथ जाकर दिया पहला वोट
खजूरी की ईशा, निधी, दिशा, शीतल और शिरीन ने एक साथ पहली बार मतदान किया। उन्होंने सफाई के मुद्दे पर वोट दिया। प्रदूषण भी इनका महत्वपूर्ण मुद्दा रहा। परिवार में उम्र में बड़े लोगों के विचारों, सुझावों को दरकिनार कर इन्होंने अपने दोस्तों के साथ वोट देने के लिए जाने का निर्णय लिया, ताकि कोई उन्हें अपने विचारों से प्रभावित न कर पाए।

जमकर हुआ मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्रों में मतदान
दिन चढ़ने के साथ ही मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्रों में मतदाताओं की कतारें लगनी शुरू हो गई थीं। ओखला हो या सीलमपुर, मुस्तफाबाद हो या चांदनी महल हर जगह यही नजारा था। सुबह के समय पोलिंग स्टेशन कुछ समय के लिए खाली दिखे, लेकिन समय बीतने के बाद 
भीड़ बढ़ती ही चली गई। ज्यादातर पोलिंग स्टेशन पर पुरुषों की अपेक्षा महिलाएं ज्यादा दिखीं। मुस्लिम महिलाएं अपने बच्चों को भी मतदान केंद्रों पर लाती दिखीं। 

अनधिकृत कॉलोनियों में लाइन पाॅश में बूथ खाली 
अनधिकृत कॉलोनियों के मतदाताओं में रोष दिखा। महंगाई, गंदगी, मतदाता सूची में नाम नहीं होने पर नाराजगी और बढ़ती दिखी। पॉश इलाकों में कम मतदान हुआ जबकि अनधिकृत कॉलोनियों में अधिकतर लोगों ने बदलाव के लिए मतदान किया। मतदाताओं का कहना था कि इस चुनाव में भ्रष्टाचार, प्रदूषण और साफ सफाई की समस्या के खिलाफ लोग मतदान कर रहे हैं। वहीं, द्वारका इलाके में अधिकतर सोसाइटियां हैं जबकि कॉलोनियों में भी लोगों को सभी बुनियादी सुविधाएं मिल रही हैं। समस्याएं कम होने की वजह से लोगों का रुझान भी चुनाव की तरफ थोड़ा कम दिखा। आदित्य ने बताया कि सूची में उनका नाम तो है, लेकिन परिवार के सदस्यों का नहीं है। इससे उन्हें अधिकार का इस्तेमाल करने का मौका नहीं मिला। ब्यूरो

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इस बार नारी शक्ति ने अपने दम पर 68 पिंक बूथों पर मतदान संपन्न करवाया। मतदाताओं के लिए रेड कार्पेट बिछाए और मतदान केंद्र के द्वार को फूलों से सजाकर स्वागत किया। बुजुर्ग मतदाताओं के साथ बीएलओ ने सेल्फी खींची और पहली बार वोट करने आए मतदाताओं से हाथ मिलाया। सुरक्षा की जिम्मेदारी भी महिला पुलिसकर्मियों ने संभाली और सभी बूथों पर शांतिपूर्वक मतदान को पूरा कराया।

पूर्वी दिल्ली में समसपुर गांव के अंदर स्कूल में पिंक बूथ बनाया गया था। यहां सेक्टर अधिकारी संघप्रिया के नेतृत्व में मतदान संपन्न हुआ। दो बीएलओ पूनम पाठक और अर्चना गोला ने अपनी जिम्मेदारियों का कुशलता से निर्वहन किया। सब इंस्पेक्टर सोनम, हेड कांस्टेबल शीतल, माया, आशा, मनीषा और गुड्डी ने सुरक्षा की जिम्मेदारी संभाली। संघप्रिया ने बताया कि यहां दो पोलिंग बूथ थे। इनमें से एक सामान्य था। लेकिन दोनों को पिंक की तरह से विकसित किया गया। यहां पर छह महिला सुरक्षाकर्मियों, दो बीएलओ, पोलिंग टीम की चार अन्य महिला सदस्यों ने पूरी मतदान प्रक्रिया को संभाला।

मतदान केंद्र को पिंक थीम पर सजाया गया। द्वार से ईवीएम तक रेड कार्पेट बिछाई गई थी। हेल्प डेस्क, जरूरतमंद लोगों को मतदान केंद्र लाने ले जाने के लिए ई-रिक्शे और फर्स्ट एड का भी इंतजाम किया गया था। मतदान केंद्र पर व्लील चेयर की व्यवस्था थी। इस बूथ पर कुल मतदाताओं के लिहाज से मतदान का प्रतिशत दोपहर 2.20 बजे तक कम था। केवल 21 फीसदी मतदान हुआ था। संघप्रिया ने बताया कि मतदान के दो दिन पूर्व घर घर जाकर जागरूकता अभियान चलाया गया था और चौपाल भी लगाई गई थी। लेकिन वोट देने में कम लोगों ने दिलचस्पी दिखाई।

रंग-बिरंगी सियासी टोपियों ने उड़ाया आचार संहिता का मजाक

मतदान के दौरान रंग-बिरंगी सियासी टोपियों ने चुनाव आचार संहिता का जमकर मजाक उड़ाया। लगभग सभी कार्यकर्ताओं ने अपनी पार्टी के झंडे के रंग की टोपियां पहनी हुईं थीं। सभी पोलिंग बूथ के आसपास मंडराकर मतदाताओं को रिझाने का प्रयास कर रहे थे। कुछ जगहों पर पुलिसकर्मियों ने उन्हें टोक कर टोपियां उतरवा दीं, लेकिन ज्यादातर जगह लोग टोपी का किसी पार्टी से संबंध न होने की बात कर बच रहे थे। कुछ लोगों ने तो पार्टी के झंडे के रंग के कपड़े तक पहने हुए थे। वहीं, महिलाएं भी इस मामले में पीछे नहीं दिखीं। उन्होंने भी झंडे के रंग की चुन्नियां पहनी हुई थीं।

ओखला विधानसभा के कई मतदान केंद्रों के आसपास कुछ ऐसा ही नजारा था। किसी ने केसरिया तो किसी ने हरे, लाल व नीले रंग की टोपियां पहनी हुईं थीं। एक पार्टी से जुड़े कार्यकर्ता ने बताया कि अपने कार्यकर्ताओं की पहचान करने के लिए चुनाव प्रचार समाप्त होने के बाद इस तरह की टोपियां बनाकर बांट दी जाती हैं। मतदान वाले दिन इनका खूब इस्तेमाल होता है। वोटरों को घर से निकालकर केंद्रों तक पहुंचाने और अपने लिए वोट मांगने में इनका इस्तेमाल होता है, चूंकि टोपियों पर किसी भी पार्टी का चुनाव चिह्न नहीं होता। ऐसे में कोई चाहकर भी कुछ नहीं कर पाता। हालांकि, जामिया नगर के अबुल फजल एंक्लेव इलाके में पुलिस ने जबरन ऐसे कार्यकर्ताओं की टोपियां उतरवा दीं, लेकिन महिला कार्यकर्ताओं से कुछ न कह सके।

पैसे बांटने की झूठी सूचना से हड़कंप

दक्षिण जिले की आंबेडकर नगर थाना पुलिस को रविवार दोपहर भाजपा कार्यकर्ताओं की ओर से पैसे बांटकर मतदाताओं को प्रभावित करने की सूचना मिली। सूचना वार्ड नंबर-166, पुष्प विहार के आम आदमी पार्टी के प्रत्याशी अरुण नवारिया ने दी थी। मौके पर पहुंची पुलिस ने कई घंटे की जांच के बाद सूचना को झूठा करार दे दिया।

डीसीपी चंदन चौधरी ने बताया कि अरुण नवारिया ने दोपहर 1:21 बजे सूचना दी थी कि बुद्धा पार्क मदनगीर में भाजपा के कार्यकर्ता मतदाताओं को पैसे बांट रहे हैं। थानाध्यक्ष व एटीओ इंस्पेक्टर बीडी मीणा को मौके पर भेजा गया तो एक भी भाजपा कार्यकर्ता नहीं मिला। पुलिस को मदनगीर निवासी प्रदीप (25) मिला, लेकिन उसका किसी भी पार्टी से संबंध नहीं था। प्रदीप ने बताया कि वह गुरुग्राम में एक फर्नीचर वर्कशॉप में काम करता है। डीसीपी ने बताया कि दक्षिण जिले में कहीं भी पैसे नहीं बांटे गए और मतदान सभी जगहों पर शांतिपूर्ण रहा।

आयोग ने पल्ला झाड़ा

एमसीडी चुनाव के दौरान रविवार को प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष चौ. अनिल कुमार समेत बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में नहीं मिलने के मामले में दिल्ली राज्य चुनाव आयोग ने पल्ला झाड़ लिया है। आयोग का कहना है कि वह न मतदाता सूची में नाम जोड़ता है और न ही हटाता है। इसके अलावा मतदाता सूची को भी अंतिम रूप भी नहीं देता है। वह एमसीडी चुनाव के दौरान भारत के निर्वाचन आयोग के अधीन दिल्ली के मुख्य चुनाव कार्यालय की ओर से उपलब्ध कराई जाने वाली मतदाता का उपयोग करता है। मतदाता सूची में नाम जोड़ने व हटाने का कार्य केवल दिल्ली के मुख्य चुनाव कार्यालय करता है। 

सुबह डाले वोट, शाम को मस्ती

राजधानी में रविवार को मतदान करने के बाद लोगों ने शाम को परिवार के साथ मौज मस्ती की। दिल्ली के विभिन्न पर्यटन स्थलों पर लोगों का हुजूम देखने को मिला। इंडिया गेट, लाल किला, जामा मस्जिद, पुराना किला व चिडिय़ाघर में शाम तक लोगों की काफी भीड़ दिखी।

मताधिकार का प्रयोग करने के बाद शहरवासी मस्ती के मूड में दिखे। सबसे अधिक भीड़ लाल किला और चिडिय़ाघर में देखी गई। परिवार के साथ चिडिय़ाघर पहुंचे रमेश आहूजा ने कहा कि उन्होंने एक दिन पहले ही घूमने की योजना बना ली थी। इस वजह से सुबह जल्दी ही परिवार के साथ मतदान किया। इसके बाद घूमने निकल गए। वहीं, तिलक नगर से पहुंची शांति गुप्ता ने कहा कि छुट्टी का दिन होने की वजह से उन्होंने बच्चों को चिडिय़ाघर दिखाने की योजना बनाई थी। इसलिए मतदान के बाद सीधे चिडिय़ाघर का रुख किया। लाल किला देखने के लिए पटेल नगर से पहुंचे आशुतोष यादव ने कहा कि मतदान करने के बाद घर में रहने से बेहतर है कि परिवार के साथ किसी पर्यटन स्थल पर समय बिताया जाए।

न उम्र की सीमा थी, न तबके का था बंधन

मताधिकार का इस्तेमाल करने में बुजर्गों का जोश युवाओं से कम नहीं रहा। चलने फिरने में दिक्कत होने के बावजूद वह लाठी या फिर अपने बच्चों का सहारा लेकर मतदान केंद्रों पर पहुंचे। बुजुर्गों का कहना था कि वे इलाके की साफ सफाई और निगम से संबंधित मुद्दे को ध्यान में रखकर मतदान करने आए हैं। वे युवाओं को बताना चाहते हैं कि मत का इस्तेमाल कर ही वह निगम में साफ सुथरे छवि वाले लोगों को भेज सकते हैं। तमाम दिक्कतों और मुश्किल के बाद भी बाड़ा हिंदूराव के डिप्टीगंज निवासी 106 साल की शांति वाला वैध रविवार सुबह कन्या विद्यालय स्थित पोलिंग बूथ पर मत देने पहुंचीं। दिल्ली के अलग-अलग इलाकों से सैकड़ों की संख्या में बुजुर्ग मतदान केंद्र पर पहुंचे। इनमें ज्यादातर व्हील चेयर पर थे। इनका पुलिसकर्मियों ने खास ध्यान रखा और सहायता कर मतदान केंद्र पर पहुंचाया। ख्याला की 85 साल की सुरिंदर कौर लाठी का सहारा लेकर पहुंचीं। ऐसा ही कुछ दिल्ली के तुर्कमान गेट पर देखने को मिला, जहां एक बेटा अपने बुजुर्ग पिता को बाइक से लेकर आया था। दिल्ली में ऐसे सैकड़ों बुजुर्गों ने अपने जोश दिखाकर इस महापर्व में हिस्सा लिया और भविष्य की नींव रखी।

किराड़ी : दुल्हन वोट डालने पहुंची

हंसराज पब्लिक स्कूल के मतदान केंद्र पर एक दुल्हन वोट डालने पहुंची। सजी-धजी पहली बार वोट डालने पहुंची युवती ने कहा कि सफाई, कूड़े, सीवरेज सिस्टम जैसे मुद्दों को ध्यान में रखकर वोट दिया है। शाम को युवती के फेरे होने थे, उससे पहले मतदान केंद्र पर एक मिसाल कायम करते हुए उसने दूसरे लोगों से भी वोट देने की अपील की। 

पांच दोस्तों ने एक साथ जाकर दिया पहला वोट

खजूरी की ईशा, निधी, दिशा, शीतल और शिरीन ने एक साथ पहली बार मतदान किया। उन्होंने सफाई के मुद्दे पर वोट दिया। प्रदूषण भी इनका महत्वपूर्ण मुद्दा रहा। परिवार में उम्र में बड़े लोगों के विचारों, सुझावों को दरकिनार कर इन्होंने अपने दोस्तों के साथ वोट देने के लिए जाने का निर्णय लिया, ताकि कोई उन्हें अपने विचारों से प्रभावित न कर पाए।

जमकर हुआ मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्रों में मतदान

दिन चढ़ने के साथ ही मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्रों में मतदाताओं की कतारें लगनी शुरू हो गई थीं। ओखला हो या सीलमपुर, मुस्तफाबाद हो या चांदनी महल हर जगह यही नजारा था। सुबह के समय पोलिंग स्टेशन कुछ समय के लिए खाली दिखे, लेकिन समय बीतने के बाद 

भीड़ बढ़ती ही चली गई। ज्यादातर पोलिंग स्टेशन पर पुरुषों की अपेक्षा महिलाएं ज्यादा दिखीं। मुस्लिम महिलाएं अपने बच्चों को भी मतदान केंद्रों पर लाती दिखीं। 

अनधिकृत कॉलोनियों में लाइन पाॅश में बूथ खाली 

अनधिकृत कॉलोनियों के मतदाताओं में रोष दिखा। महंगाई, गंदगी, मतदाता सूची में नाम नहीं होने पर नाराजगी और बढ़ती दिखी। पॉश इलाकों में कम मतदान हुआ जबकि अनधिकृत कॉलोनियों में अधिकतर लोगों ने बदलाव के लिए मतदान किया। मतदाताओं का कहना था कि इस चुनाव में भ्रष्टाचार, प्रदूषण और साफ सफाई की समस्या के खिलाफ लोग मतदान कर रहे हैं। वहीं, द्वारका इलाके में अधिकतर सोसाइटियां हैं जबकि कॉलोनियों में भी लोगों को सभी बुनियादी सुविधाएं मिल रही हैं। समस्याएं कम होने की वजह से लोगों का रुझान भी चुनाव की तरफ थोड़ा कम दिखा। आदित्य ने बताया कि सूची में उनका नाम तो है, लेकिन परिवार के सदस्यों का नहीं है। इससे उन्हें अधिकार का इस्तेमाल करने का मौका नहीं मिला। ब्यूरो

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